
चुनाव में सेल्फ़ी का जमाना है,
वोट डाल कर सेल्फ़ी लेना है,
तर्जनी की स्याही दिखाना है,
भारतीय नागरिक कहलाना है।
अब के नेता जी आज कहते हैं,
उँगली में स्याही तो लगवाना है,
तभी किसी पर उँगली उठाना है,
वर्ना यह अधिकार भी गवाँना है।
अब नेताओं की यही धमकियाँ हैं,
वोट देने का अधिकार हो ना हो,
वोट लेने का अधिकार अवश्य है,
वोट माँगना उनका कर्तव्य नहीं है।
अब वो न कोई वादा करते हैं,
और न ही कोई वादा निभाते हैं,
चुनाव लड़कर जीत जब जाते हैं,
सेवक नहीं माननीय बन जाते हैं।
हमारे स्मार्ट शहर में पैंसठ प्रतिशत
मकानों में पानी की सप्लाई नहीं है,
पैंसठ प्रतिशत शहर में सीवर की
आज तक कोई सुविधा भी नहीं है।
उनके वादे न कभी निभाये जाते हैं,
अब तो वादे करना भी भूल गए हैं,
जनता को एक ही दिन मिलता है,
वह पाँच साल के बाद ही आता है।
अब वह परम्परा भी ख़त्म हो गई,
लोकतंत्र की लगता इतिश्री हो गई,
विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है,
आदित्य पर जनता के लिए नहीं है।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ












