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मां ,एक ऐसा शब्द जिससे जीवन की शुरुआत होती है।

अपने विचारों का प्रारंभ मैं उसे रिश्ते से कर रही हूं जिससे इंसान का जन्म होता है क्योंकि मेरी नजरों में “मां” का रिश्ता ऐसा होता है जिसके सामने सभी रिश्ते छोटे पड़ जाते हैं । हालांकि पिता का स्थान भी बहुत ही ऊंचा होता है लेकिन उसका एक अलग महत्व है , मां तो मां होती है युधिष्ठिर ने कहा था “कि पृथ्वी से बड़ी माता और आकाश से ऊंचा पिता होता है ” । हम सब इस बात को जानते हैं लेकिन कितने लोग हैं जो इसका पालन करते हैं । अगर देखा जाए तो आज के रिश्तों के अर्थ ही बदल गए हैं ।  आज “मां “शब्द का अर्थ केवल जन्म देने वाली मां से ही लगाया जाता है  । लेकिन अगर हम इस बात को समझे तो एक आदर्श स्थापित कर सकते हैं ।‌ मां-बाप का प्यार तो जीवन में एक बार मिलता है । बहुत से ऐसे बदनसीब लोग होते हैं जो इससे भी वंचित रह जाते हैं, और  ताउम्र वे अपनी तकदीर को कोसते रहते हैं।  लेकिन एक बात कहूं तो मेरी नजर में उनसे ज्यादा बदनसीब वो लोग होते हैं जो सब कुछ होते हुए भी जानबूझकर अपने आप को मां-बाप के प्यार से वंचित कर लेते हैं । आज ऐसे लोगों की दुनिया में कमी नहीं है जो अपने रास्ते में स्वयं कांटे बिछा लेते हैं । लेकिन जब उन पर चलना पड़ता है, तो रो-रो कर अपनी किस्मत को दोष देते हैं । अरे ‘ जब हमारे पास हीरा था तो हमने पत्थर समझकर उसे फेंक दिया । लेकिन जब मालूम हुआ तो रोने लगे ।
     ” मां “वह है जो अपने बच्चों को कभी कष्ट में नहीं देख सकती वह अपना सर्वस्व देकर भी अपने बच्चों को खुश रखना चाहती है ।  एक बार एक दुष्ट लड़के ने किसी के बहकावे में आकर मां से उसका हृदय मांगा । अपने बेटे की खुशी के लिए मां ने अपने हाथों से अपना कलेजा काट कर बेटे को दे दिया था। आज ऐसे बेटों की भरमार है ऐसी माताएं भी हैं जो हर समय अपने बच्चों की खुशी के लिए अपना सर्वस्व निछावर करने को तैयार रहती है  । लेकिन ऐसी बात नहीं है कि हमारे यहां आदर्श संतान की कमी है ।  श्रवण कुमार ने अपने अंधे माता-पिता के लिए क्या नहीं किया, भगवान श्री राम ने माता कैकेई की खुशी और पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए राजकाज का त्याग दिया था । बात सिर्फ रिश्तो को समझने की है ।  एक मां के इतने एहसान होते हैं कि अगर हमें उन्हें चुकाने के लिए 10 जन्म भी लेने पड़े तो वह भी थोड़े होंगे ।दुःख तो इस बात का है कि हम इन बातों को सुनते तो हैं, समझते भी हैं लेकिन व्यवहार में नहीं ला पाते ।
    ” मां क्या है” इस बात को समझ लिया तो उद्धार अन्यथा जीवन पर धिक्कार ।

प्रिया काम्बोज प्रिया
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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