
सुरम्य, सुरभित, संभाव्य एक नीड है कविता
संभावनाओं का प्रतिकार भी है कविता
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जब चल पड़े उस पथरीले मुहाने की ओर
भावों का अनगिनत प्रवाह है कविता
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मन की स्वीकार्यता का अनुबंध है कविता
सजल, सुमधुर, साधिकार अनिवार्यता भी है कविता
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हर सांस मध्य एक निर्धारित डोर है कविता
मानस के हृदय का अविलंब आधार है कविता
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सुधियों का आचमन, स्नेह द्वार है कविता
समय के हृदय पर दस्तक देती
एक भूल सुधार है कविता
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जब जब भी यादों का संसार गहराया
अपनों के मध्य विचारों का
अहसास है कविता
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नव आस, नव पल्लव, नव आधार है कविता
अव्यक्त होते मन के द्वार पर
एक शिला लेख है कविता
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सरोज बाला सोनी
कवयित्री












