
मानव जीवन भंवरों से भर पड़ा है
वह निरंतर एक जैसे नहीं होता है
ऋतु चक्र के अनुसार बदलती है
कुछ समय हर्ष और पीड़ा होता है।
प्रकृति में बदलाव संभव होती है
इससे कई उलझन पैदा होते है
पतझड़ में प्रकृति सूख जाते हैं
बसन्त में कुदरत हरेला होते हैं।
कभी कभी नभ के रूप बदलता है
वर्षा ऋतु में मेघ काले होकर गरजते हैं
शीत ऋतु में मेघ नित हिम बरसाते हैं
ग्रीष्म ऋतु में मेघ देखे तो भय लगते हैं।
ऋतु चक्र से जीवन बदलता होता है
जैसे रात में कुछ दिन कांति होती है
वैसे कुछ दिन अंधकार छा जाता है
इसे मानव जिंदा सुख दुख के मिलन है।
श्रीनिवास एन, आंध्रप्रदेश












