
अनपढ़ गाँव में गाय चराए और खाए दुध मलाई।
पढ़ेलिखे शहर में कुत्ते घुमाए यह फैशन देखा न जाय।।
बड़ी दु:ख भरी बात है साहेब यह बात कुछ समझ न आय।
गाँव में कुत्ते बिल्ली को हम द्वार तक ही रखते शहर में बिस्तर पर सुलाय।।
बड़ी अजीबों गरीबों बात देखने को मिलता है साहेब शहर में।
एक दिन गाय को रोटी खिलाने से वो पुण्य का भागी कहलाय।।
गाँव में जो हर खिलातें हैं अपने हिस्से का भी रोटी वो मुर्ख है कहलाय।
आजकल गाँव के लड़के भी गाय भैस छोड़ कर शहर चला आता है।।
रोजगार नहीं मिलता है तो साहेब चलों कुत्ते ही घुमाया जाय।
गरीबी जिंदा दफना देता है जब आत्मा जमीर मर जाय।।
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,












