
क्या कभी इस रहस्य से पर्दा उठ सकेगा,
कौन चांदी के चम्मच के साथ पैदा होते हैं,
और वहीं कुछ गरीब की झोपडपट्टी
में शरीर धारण के बाद पैदा होते हैं।
गरीबी इंसान के लिए अभिशाप एवं
सम्पूर्ण मानवता के लिए कलंक है,
इसलिये गरीबी हटाओ कार्यक्रम हर
सरकार की हर दल की प्राथमिकता है।
इसके बावजूद आज हम स्वतंत्रता के
बाद जब अमृत महोत्सव मना रहे हैं,
किसी किसी घर में चूल्हा नहीं जलता है,
हर तीसरा व्यक्ति यहाँ भूखा ही सोता है।
कुछ घरों से कूड़ेदान में सूखी रोटियाँ,
सड़ा चावल एवं अन्य बेशकीमती
भोज्य पदार्थ फेंक दिया जाता है,
अन्त्योदय योजना नितांत असफल है।
आज यही ध्रुव सत्य है, आवश्यकता है,
कि विकास की सीढ़ी पर खड़े सबसे
निचले पायदान के हर व्यक्ति को
काम व उन्हें हर सहायता दी जाए।
पर पात्रता निर्धारित करने की सबसे
बड़ी समस्या है, अभी भी स्थिति वही है,
कि येन केन प्रकारेण फ़र्ज़ीवाड़ा कर
अक्सर अपात्र गरीबों का हक मारते हैं।
ग़रीबों की संख्या लाख कोशिशों के
बावजूद आजादी के बाद लगातार
बढ़ रही है, अपात्र लोगों के अलावा
सरकारें/कर्मचारी भ्रष्टाचार में डूबे हैं।
सरकारी सुविधाओं के अलावा
एनजीओ एवं प्राइवेट एजेन्सी में
भी अपात्र बाजी मार ले जा रहे हैं,
संसाधनों पर अपना हक़ जमा रहे हैं।
अन्त्योदय की योजना की सफलता,
अपात्रों की संख्या पर पूर्ण नियंत्रण,
इनकी संख्या शून्य पर पहुँचाना,
आदित्य आज अति आवश्यक है।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ












