
मैं छोटी सी मोमबत्ती हूँ ,
पर हिम्मत बड़ी दिखाती हूँ।
काली रातों के आँगन में ,
उम्मीद की रोशनी लाती हूँ।
तूफानों से क्या डरना है ,
यह संदेश सुनाती हूँ।
खुद जलकर भी दूसरों के,
चेहरे में मुस्कान लाती हूँ।
मंदिरों में आरती बन जाती ,
कभी चर्च में जल जाती हूँ।
कभी किसी के जन्मदिन में,
मोमबत्ती बन मुस्काती हूँ।
अनिता महेश पाणिग्राही
सरायपाली छत्तीसगढ़












