
सुन्दरता सस्ती है, चरित्र महँगा है,
घड़ी सस्ती है, पर समय महँगा है,
शरीर सस्ता है, जीवन महँगा है,
रिश्ता सस्ता है, निभाना महँगा हैं।
अनुभव कहता है कि क्रोध और
आँधी-तूफ़ान जब आते हैं तब,
ये सब एक समान ही आते हैं,
शांत होने पर हानि बता जाते हैं।
जो कुछ जितना भी मिला है,
मुझे वह ही सबसे अच्छा है,
जीवन में संतोष धन वास्तव
में सबसे अच्छा धन होता है।
जिसने भी यह सच्चाई सच्चे
हृदय से स्वीकार कर लिया,
उसने अपने सारे जीवन की
सारी सुख शान्ति पा लिया।
उलझनों का बोझ, दिल से उतार दो,
बहुत छोटी है ज़िंदगी, हँस के गुजार दो,
जिंदगी है शेष जो, उसे विशेष बनाना है,
जीवन के बाद में तो अवशेष ही होना है।
अपने ही खुद के अन्दाज़ से जीने
के लिये हममें जुनून होना चाहिये,
परिस्थितियाँ यदि विपरीत हों तो भी,
विजय का संघर्ष जारी रखना चाहिये।
काश ! ऐसी कोई एक हवा तो चले,
संसार में कौन किसका है,पता चले,
आदित्य गोपनीयता अनमोल है पर,
कभी तो ज़रूरी है उसका भी पता चले।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ












