
हे पथिक! तूफानों से लड़ना सीखो
जान लो जिन्दगी एक संघर्ष है
हार और जीत इसके दो पहलू हैं
जिसने तूफानों से लड़ना सीख लिया
वह जिन्दगी की हर जंग को जीत सकता है
तूफानों से हमेशा लड़ना सीखो
विपदाओं में कभी ना घबराना
साहसी बनकर अपने पथ से
विचलित ना होना
सदा सत्य के मार्ग पर है अडिग रहना
जीवन के पथ पर है चलते जाना
यही हमारे जीवन का असली धर्म है
तूफानों से तुम डरो नहीं रखो बुलंद हौसला
जिस प्रकार नाव लहरों से डर कर
पार नहीं होती
तुम हिमालय की तरह अटल और निडर रहो
चाहे हो तपती गर्मी, वर्षा की झंझावात, ठंड की ठिठुरन
तुम आगे बढ़ते रहो मंजिल की ओर रुको नहीं
तूफान से लड़ने वालों की कभी
हार नहीं होती
एक नन्हीं चींटी दाना के लिए दीवारों पर जाने कितनी बार फिसलती है
उसके मन का विश्वास उसके रग में साहस भरता है
तुम जीवन के कठिन झंझा बातों से बाहर निकल आओगे
जब तक सांस है तब तक आस
अगर हो हौसला तूफानों से लड़ने का
तो जिंदगी में कुछ भी नहीं है मुश्किल
थाम लो दामन हौसले का तो
तुम्हारी जीत सुनिश्चित है
पथिक तुम अपने कर्तव्य पथ पर चलता चल लक्ष्य की ओर
तेरी जीत होकर रहेगी
चाहे जितना अंधियारा आए जिंदगी में
उजाले से रोशन करने का हौसला
हौसला रखो
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
डॉ मीना कुमारी परिहार












