
ए जिंदगी बता तू क्या छिपा रही है
क्या है जो बताना चाह रही है
तेरे आगोश मे ही मेरा वजूद है
फिर क्यों मुझसे मेरा ही अक्स मिटा रही है
ए जिंदगी बता तू क्या छिपा रही है
हर ज़ज़्बात तेरे सुलझनों से परे है
उधेड़बुन की असीमित गलियों से घिरे है
समझ से ऊपर ए जिंदगी समझ के ही सहारे है
धुंधला सा ये जहान और बिखरे बिखरे से इशारे है
अंजान सी ए जिंदगी तू चली जा रही है
ए जिंदगी बता तू क्या छिपा रही है
मंजिल ए जिंदगी बता तेरी क्या है
चलना है चलने की वजह क्या है
दूर तलक नज़रों से ओझल तेरी सदाई है
वक्त के सितम ईबारत क्या बना रही है
ए जिंदगी बता तू क्या छिपा रही है
जिंदगी मिली तू खूब मिली हैरान मिली
वक्त के कहर से नासमझ परेशान मिली
मकसद ए जिंदगी तेरा इम्तिहान हो गया
तुझे जीना कसम ईमान हो गया
पल दर पल ही तू जहन मे समा रही है
ए जिंदगी बता तू क्या छिपा रही है
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र












