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गीत सृजन

प्रदत्त बोल -मुखड़ा——

तेरी महफ़िल में किस्मत आज़मा कर हम भी देखेंगे।
घड़ी भर को तेरे नज़दीक आकर हम भी देखेंगे।।

तेरे वृंदावन की गलियों में आकर हम भी देखेंगे,
मुरली की मधुर धुन को सुनाकर हम भी देखेंगे।

सुना है नाम लेते ही मिलन हो जाता कान्हा से,
तेरे चरणों में मन को बसाकर हम भी देखेंगे।
तेरी भक्ति की राहों में जो आनंद मिलता है,
उसी आनंद में खुद को भुलाकर हम भी देखेंगे।
घड़ी भर को तेरे नज़दीक आकर हम भी देखेंगे।

तेरे नटखट से रूप पे दिल ये हार बैठा है,
तेरी माया के रंगों में नहाकर हम भी देखेंगे।
मिले जो प्रेम राधा-सा तेरी भक्ति के सागर में,
तेरी यमुना के तट पर मुस्कुराकर हम भी देखेंगे।
घड़ी भर को तेरे नज़दीक आकर हम भी देखेंगे।

तेरे दरबार में जो भी गया खाली नहीं लौटा,
तेरे चरणों में शीश झुकाकर हम भी देखेंगे।।
कभी गोपियों-सी प्रीत जगे इस सरल से मन में,
तेरे चरणों में जीवन को बिताकर हम भी देखेंगे।
घड़ी भर को तेरे नज़दीक आकर हम भी देखें गे।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर ,बिहार

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