
देखते ही देखते साल बीत गये
पापा आप क्या गये जैसे दिन ही रूठ गये
यकीं नही है पापा कि आप कहीं खो गये
ऐसा लगता है कि आप नही हम एक नींद सो गये
खामोशी आपकी आज भी हमे सालती है
घर की दीवारें भी आपको ही पूकारती है
यादे आपकी घर के हर कोने मे है
आवाज पापा आपकी आज भी ज़िन्दा मेरे सीने मे है
आज भी आपकी एक आवाज के लिये तड़पता हूँ
पापा आप नही इस हकीकत पर आज भी बहुत रोता हूँ
आप से ही हमारा वजूद था
घर की मजबूत एक नींव सबूत था
वो फिजा वो बहार अब नही आती
घर की सूनी दीवारे दिन रात ही रुलाती
काश कि ये समय चक्र पलट जाये
फिर से हम पापा आपकी डांट खाए
जीवन जीने के आपके उसूलों को अपनाएं
बस एक बार वापस आ जाओ पापा
बस एक बार वापस आ जाओ पापा
अबकी बरस भी बहुत रुलाये पापा
अबकी बरस फिर बहुत याद आये पापा
लिख रहा हूँ आँसूं नही रुक रहे
हाथ भी कम्बख्त क्यों कंप रहे
अबकी जो ना लिख पाऊँ पापा आप लिख जाओ
अधुरी ज़िन्दगी की कहानी आप पूरी कर जाओ।
आपकी 20वीं पुण्यतिथी पर अन्श्रूपूरित क्षृद्धांजली पापा
सन्दीप सक्सेना
जबलपुर म प्र












