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  • मासूमियत

    बच्चे हो या जवान बूढ़े हो या कुछ उम्रदराज जिनके चेहरे पर मासूमियत होता है,अक्सर नियत से साफ वही इंसान…

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  • संतुष्टि

    संतोषम् परम् सुखम्, सत्य है ये उक्तिसुखी वही रहा जगत मे जिसको है संतुष्टिजो भी है,जैसे भी है,जितना है पास…

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  • कविता

    कविताएँलिखना जरूरी हैक्योंकिउनमे संवेदनाओं की जमीन परफूटते है अंकुरये शब्दों की फसलइसलिए भी है जरूरीताकि बच सकेवजूदइंसानियत कासब कुछ खत्म…

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  • जिंदगी

    जिंदगी है ,एक पागल की हंसी !एक कंगाल की मुट्ठी काबन्द एहसास !जिंदगी कुटिल द्रोणाचार्य है !और वक्त एककपटी बगुला…

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  • पंछी फूलों तितली तक का जिक्र हुआ

    पंछी फूलों तितली तक का जिक्र हुआकैसे कहूं कि किस किस का था जिक्र हुआ। होना चाहिए था जिसका कि…

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  • भक्ति आंदोलन में हिन्दी भाषा

    साहित्य जगत का मध्यकालजो भक्ति काल कहलाता है,भक्ति आन्दोलन में हिन्दी भाषाविकसित खूब हुई फली फूली है। भारत के तत्कालीन…

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  • जिंदगी एक सितम

    विधा – काव्य हर मौसम हर दिन एक सितम है मेरे लियेजी रहे है ये भी एक गम है मेरे…

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  • ग़ज़ल

    हाथ वो अपने छुपा देता है।रोज जो मुझको सजा़ देता है। मैं यहाँ दोस्ती निभाता हूँ।वो वहाँ मुझको दग़ा देता…

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  • कविता

    आखिरी दिन भी रही प्रचार की धूम,अब वो घर घर जाकर जन संपर्क कर रहें हैं,घर पर जाकर जनसंपर्क कर…

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  • नवगीत- मशीनों के जंगल में

    मुखड़ाकल की नस में आज बहे,मन का अपना रक्त रहे,मशीनों के जंगल में भीमन का एक वृक्ष रहे। नीली-नीली स्क्रीनें…

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