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परमवीर चक्र विजेताओं के शौर्य को समर्पित रही कल्पकथा परिवार की २३२ वीं रविवारीय काव्य संध्या।
कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार के तत्वावधान में आयोजित २३२वीं साप्ताहिक काव्यगोष्ठी एक गरिमामय, भावप्रवण एवं राष्ट्रचेतना से परिपूर्ण साहित्यिक आयोजन…
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परछाइयाँ
“परछाइयाँ जिन्हें दबा दिया गया था—अब वे अंजना को पुकार रही थीं।”बाहर उठी वह खुरदरी आवाज़कुछ पल तक हवा में…
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नहीं देख सकता
मैं जानता हूँ उसे किसी और का होते नहीं देख सकताये ईर्ष्या नहीं है, बस दिल इतना छोटा नहीं देख…
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जांगर
छत्तीसगढ़ी कवितास्वरचित जांगर मोर छत्तीसगढ़ के, दिल के गहराई ले भरा।खेत खार मा पसीना बहत, आंसू जइसे गिरा।सूरज निकलत बिहनिया…
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नव वर्ष
मैं हूँ क्योंकिमेरे साथ आप सब हो।।मेरा अस्तित्व है क्योंकि,मेरे साथ आप सब हो।।मेरा कर्तव्य पथ गतिशील रहा क्योंकि,उसके मार्गदर्शक…
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नारी की कहानी
नारी की कहानी सुना रही हूँ अपनी ज़ुबानी।सदा पूरी करती हैं अबला सबकी मनमानी।। जग की हर औरत अपने घर…
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सामयिक चर्चा
{इस लेख में— श्रद्धा भक्ति के साथ गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र की चर्चा} दुख में सुमिरन सब करे सुख…
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मझधार
सब फंसे मझधार मेंतलाशते फिर रहे है किनारा,पढ़ लिख कर घूम रहेकैसे चलेगा दुनिया में गुजारा।बांह चढ़ा कर घूम रहेजीवन…
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जिज्ञासा
सब कुछ तेरा, कुछ नहीं मेरा,मन क्यों भटके देख सबेरा।रंग बिरंगी इस दुनिया का,तु ही तो बस एक रचयिता। अंग…
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नारी की कहानी
नारी की कहानी सुना रही हूँ अपनी ज़ुबानी।सदा पूरी करती हैं अबला सबकी मनमानी।। जग की हर औरत अपने घर…
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