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नारी की कहानी

नारी की कहानी सुना रही हूँ अपनी ज़ुबानी।
सदा पूरी करती हैं अबला सबकी मनमानी।।

जग की हर औरत अपने घर के आंगन को सजाती है।
रमणी या कामिनी बन कर सबके दिलों को लुभाती है।।
उपवन या सुंदर बगिया को पुष्पों-सा महकाती है।
लहरों के समान आगे बढ़ती हुई मुसकुराती-लहराती है।।

सुकर्म करती हुई प्रत्येक नारी अपनी पहचान बनाती है।
शांत, सुशील आदि के आधार पर निज धर्म निभाती है।।
सामाजिक कल्याण हेतु बेटी, बहू के बखूबी फ़र्ज़ निभाती है।
समझदार और वफ़ादार कांता नींव की ईंट खुद बन जाती है।।

सदियों से महिलाओं की भूमिका श्रेष्ठ रही हैं।
महादेवी वर्मा, सुभद्रा जैसी विदुषी महान् रही हैं।।
महारानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाएँ देश में रही हैं।
किरण बेदी, कल्पना चावला भी कमाल रही हैं।।

स्त्री जब भी करती हैं खूबसूरत प्रयास।
तब बन जाती हैं वे सभी के लिए खास।।
परम् पिता परमात्मा पूरी करते हैं आस।
भामिनी रहा करती हैं हमेशा सबके आसपास।।

महान् नारियों की गाथा अधिक न सुना पाऊँगी।
सभी अबलाओं के समक्ष शीश झुकाती जाऊँगी।।
स्वयं भी महिला होने के समाज में कर्तव्य निभाऊँगी।
इस प्रकार तम को मिटा देने वाली रोशनी बन जाऊँगी।।

अंत में नारी की कहानी हर युग में आदरपूर्वक गाई जाएगी।
मातृशक्ति के द्वारा ही मानवता की राह जगमगाई जाएगी।।

कवयित्री -डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)

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