
एक बात बोलूं साहेब,पिता तो पिता होता है अंधेरे में भी रौशनी कर देता है।
बनकर वह माली अपने बाग का हर बच्चे को एक साथ सम्भालतें हैं।।
और हर बच्चा मिलकर एक अपने पिता जी को सम्भाल नहीं पाता है।
आज का युवा अपने आपको सम्भाल नहीं पाता अपने पिता को क्या सम्भालेगा।।
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,











