कवि क्या है? एक जख्म जो चलता-फिरता है,
कविता क्या है? उस जख्म से बहता लहू।
वो दर्द को शब्दों में पिरोता है,
कविता उस दर्द को अमर कर देती है।
वो रातों को जागकर रोता है,
कविता सुबह सबको रुला देती है।
कवि अगर दीपक है तो कविता उसकी लौ,
कवि अगर प्यास है तो कविता कुएं का पानी।
कवि मिट जाता है एक दिन,
कविता जीती है सदियों तक जवानी।
लोग कहते हैं कवि पागल है,
पर ये पागलपन ही तो कविता है।
जब दुनिया सोती है चैन से,
तब कवि की कलम से क्रांति लिखी जाती है।
कवि और कविता का रिश्ता वैसा,
जैसे सांस और धड़कन का।
एक रुके तो दूसरा मर जाए,
पर दोनों मिलकर जिंदा रखते हैं जमाना।
कवि के मरने पर तालियां नहीं बजतीं,
कविता के मरने पर युग मर जाते हैं।
इसलिए कवि जीता है कविता के लिए,
और कविता जीती है कवि के नाम से।
कवि – गोपाल जाटव ‘विद्रोही’
खड़ावदा, तह. गरोठ, जिला मन्दसौर, मध्यप्रदेश











