
“सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है”
चिकित्सकों को समर्पित…
जहाँ हर साँस अनमोल हो, वहाँ आपका धैर्य जीवन बन जाता है,
जहाँ आशा की लौ बुझने लगे, वहाँ आपका विश्वास उजाला बन जाता है।
आप केवल रोग नहीं हरते, भय और निराशा भी दूर करते हैं,
अपने ज्ञान, सेवा और करुणा से अनगिनत जीवनों को नया सवेरा देते हैं।
शत-शत नमन उन सभी चिकित्सकों को,
जो अपने कर्तव्य को ही अपनी सबसे बड़ी पूजा मानते हैं।
जीवन में कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जो समय के साथ पीछे छूट जाते हैं, लेकिन उनकी सीख हमेशा हमारे साथ रहती है। मेरे लिए चिकित्सा जगत से जुड़ा सफर ऐसा ही एक अनुभव है। रेडियोलॉजी के क्षेत्र में अध्ययन और अस्पताल में कार्य करते हुए मैंने जाना कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि करुणा, जिम्मेदारी और मानवता का सजीव स्वरूप है।
अस्पताल के गलियारों में मैंने दर्द भी देखा, उम्मीद भी देखी और वह मुस्कान भी देखी, जो सही समय पर मिले उपचार के बाद किसी मरीज के चेहरे पर लौट आती है। तभी समझ आया कि एक चिकित्सक केवल शरीर का उपचार नहीं करता, बल्कि टूटते हुए मन में भी विश्वास जगाता है।
आज जीवन ने मुझे एक नई दिशा दी है, पर चिकित्सा जगत से मिली सीख आज भी मेरे व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है। सेवा, संवेदनशीलता, अनुशासन और समर्पण—यही वे मूल्य हैं, जिन्हें मैंने अपने उस सफर से सीखा और आज भी अपने जीवन में संजोए हुए हूँ।
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस केवल शुभकामनाएँ देने का अवसर नहीं, बल्कि उन सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है, जो दिन-रात निस्वार्थ भाव से मानव जीवन की रक्षा में लगे रहते हैं।
मानवता की सबसे सुंदर पहचान सेवा है, और सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं।
सभी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
— श्री ठाकुर
देवघर, झारखंड












