
माँ का आलिंगन अमृतधारा, जीवन का अनुपम उपहार।
जिसमें मिलता प्रेम अनोखा, मिट जाता हर एक भार॥
कोमल बाँहों की वह छाया, जैसे शीतल चाँदनी हो।
उसकी ममता की सुगंध से, महके हर एक ज़िंदगी हो॥
रोता शिशु जब गोद में आए, पल में सारे कष्ट हरें।
मधुर स्पर्श के पावन क्षण से, मन में नव विश्वास भरें॥
माँ का आलिंगन कहता चुपके, “मैं हूँ तेरे साथ सदा।”
उसके आँचल की ऊष्मा से, खिल उठती जीवन की धरा॥
थककर जब संसार सताए, माँ का आँचल घर बन जाए।
स्नेह-सुधा की मधुर फुहारें, हर पीड़ा को दूर भगाए॥
वात्सल्य का यह दिव्य खज़ाना, ईश्वर का अनुपम वरदान।
माँ की बाँहों में मिल जाता, प्रेम, सुरक्षा और सम्मान॥
जिसने पाया माँ का आलिंगन, वह सबसे धनवान हुआ।
ममता की इस पावन छाया में, जीवन सारा महान हुआ॥
नमन करूँ उस ममता-मूर्ति को, जिसने जग जीना सिखलाया।
माँ के पावन आलिंगन ने, प्रेम का सच्चा अर्थ बताया॥
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार












