
समांत —अन
पदांत —दिखाई देता है।
मात्रा भार=16,14=30
प्रभु चरणों में झुकते ही सुख-नमन दिखाई देता है,
मन के हर कोने में दिल ये, मगन दिखाई देता है।
तेरी कृपा ज्योति से प्रभुवर अँधियारा जग से मिटता ,
हर शंका में तेरी इच्छा-गठन दिखाई देता है।
धूप गुनगुनी भली लग रही , बातें सर्दी से करती ,
झूम रहा बाधा सा बनता , पवन दिखाई देता है।
ज्योति आरती कीजलती शुभ ,महक रहा परिवेश सुखद ,
भजन सुरों में डूबा पावन , सु -मन दिखाई देता है।
रंग बिरंगे सुमन खिले हैं , धरा महकती इठलाई,
कितना प्यारा सुखद ईश का , सृजन दिखाई देता है।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार












