
कलम से कलाकार हों जाएं,
वो वक्त था जब,
अनसुनी कहानियां सुनाते थे लोग, आज वक्त हाथ में है,, कलम साथ में हैं,, नया कोई इतिहास लिखा जाए,,,,,
वरना सूने होंगे कागज़,,
थम जाएगी रफ्तार,, स्याही के जमने से पहले ही,,,
ज़रा
मन की बात कही जाएं
अशोक सुमन
भवानी मंडी (राज.)











