
राम का मंदिर बन गया तो
कुछ लोगों की नींद उड़ गई
चंदा, घंटा, दान पेटी
रातों-रात गायब हो गई
भक्त बनकर आए थे शायद
माथे पर तिलक, हाथ में थैला
“जय श्री राम” बोल-बोल कर
साफ कर गए पूरा मेला
सोचा होगा बड़े सयाने हैं
देवता क्या हिसाब माँगेगा
सीटीवी देखेगा भगवान
या पुलिस को खबर लगेगी?
अरे भाई, चोरी करनी थी
तो बैंक लूट लेते
राम के नाम की गुल्लक पर
हाथ क्यों साफ कर लेते?
एक तरफ बोलते “आस्था बचाओ”
दूसरी तरफ दान पेटी ले उड़ो
ये कैसी भक्ति है भाई
जिसमें भगवान भी लुट गए?
राम तो बैठे हैं अयोध्या में
उनका क्या बिगड़ेगा
बिगड़ेगा तो समाज का भरोसा
जो ऐसे लोगों से टूटेगा
कानून अपना काम करेगा
जेल की हवा भी खिलाएगा
और जनता ताली बजाकर बोलेगी
“भक्ति नहीं, ये नौटंकी था”
राम का घर ईंट-पत्थर का नहीं
लाखों दिलों से बना है
चोरी तिजोरी की कर लो
आस्था की तिजोरी नहीं बना है
सर्वाधिकार सुरक्षित मौलिक
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अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर, नागपुर (महाराष्ट्र)











