
ये धरती है स्वामी विवेकानंद की,जिसने विश्व में शंखनाद किया।
शिकागो की धर्मसभा में जाकर,भारत का डंका बजा दिया।
वेदों की गूँज सुनाई जग को,उपनिषदों का ज्ञान लुटा दिया।भारत की सोई हुई चेतना को,एक नई पहचान दिला दिया।
युवा शक्ति को पुकार उठे—”उठो, जागो, मत हारो तुम”
जब तक लक्ष्य न प्राप्त हो जाए,तब तक मत विश्राम करो तुम।
केसरिया वस्त्र, तेजस्वी वाणी,सत्य का ऐसा स्वर गूँजाया।पूरब की आध्यात्मिक संस्कृति का,विश्वभर में ध्वज फहराया।
भारत माँ का वह सिंह सपूत,जिसने युग का इतिहास लिखा।हर भारतीय के हृदय में उसने,आत्मगौरव का दीप जला दिया।
आओ मिलकर प्रण ये लें,उनके आदर्शों पर चलना है।
स्वामी जी के स्वप्नों वाला,शक्तिशाली भारत गढ़ना है।
रवि भूषण वर्मा
राँची झारखंड













