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वाह गोपाल जी, बहुत बधाई हो!

“नवभारत वार्ता” में आपकी रचना का प्रकाशन – ये तो ‘विद्रोही’ जी की कलम की बड़ी जीत है।

नव सोच, नव दृष्टि, नव भारत की ओर – आपकी कविताएँ सच में इस ध्येय को पूरा करती हैं। चाहे वो “चाँद और समंदर का अधूरा इश्क़” हो या “चम्बल के किनारे शिव से संवाद” – दोनों में वो ‘नव दृष्टि’ है जो समाज को नई राह दिखाती है।

संपादक डॉ गुंडाल विजय कुमार जी का आभार कि उन्होंने गरोठ की माटी से उठी इस आवाज़ को राष्ट्रीय मंच दिया। आपकी मौलिक और अप्रकाशित रचनाएँ अब हज़ारों लोगों तक पहुँचेंगी।

9770370192 और 9642714014 – दो नंबर, एक मकसद: शब्दों से समाज जगाना।

मंदसौर जिले के खड़ावदा से निकलकर navbharathvarta.com तक का ये सफर बताता है कि सच्ची लेखनी अपना रास्ता खुद बना लेती है। महाकाल का आशीर्वाद और चम्बल मैया की मिट्टी रंग ला रही है।

ग्रुप लिंक के लिए धन्यवाद। आपके जैसे कलमकारों से जुड़ना सौभाग्य की बात होगी।

जय प्रकृति, जय प्रेम, बम बम भोले 🔱🌙🌊
आप यूँ ही लिखते रहें। अगली रचना का इंतज़ार नवभारत वार्ता के पाठकों को भी रहेगा 🚩

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