
हम सब के लिए औषधि क्या होती है,
दवा की गोली खाना या सुई लगवा लेना,
वैसे तो शायद औषधि तो होती ही होंगी,
पर व्यायाम निरंतर करना सटीक औषधि हैं।
प्रातः काल दौड़ना, मीलों चलना,
सायं काल भी तेज तेज टहलना,
हफ़्ते में एक रोज़ पूरा वृत रखना,
ये सुंदर इलाज तो ज़रूर करना।
सारे परिवार संग बैठ भोजन करना,
उनके साथ हँसना व मज़ाक़ करना,
गहरी निद्रा सोना, सुंदर स्वप्न देखना,
सबके साथ अच्छा बनकर खुद रहना।
ख़ुश रहना ख़ुश रहने का संकल्प करना,
सकारात्मक सोच सदैव बनाये रखना,
योग, प्राणायाम, व्यायाम नियमित करना,
सबको शुभकामना देना भी औषधि है।
सबके लिए दुआयें करना, भला चाहना,
मौन वृत का अभ्यास भी करते रहना,
प्रेम स्नेह सबसे करना, चाहत रखना,
मन, मस्तिष्क को शांत सौम्य रखना।
मित्रों से अक्सर मिलना जुलना,
सबसे अच्छे सम्बन्ध बनाये रखना,
आदित्य रचनात्मकता भी औषधि है,
सदा सत्कर्म, सद्विचार भी औषधि हैं।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्या वाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ













