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ग़ज़ल

मुफ़लिसी में गुज़ारा करते हैं।
अपनी किस्मत संँवारा करते हैं।

कौन आता है काम मुश्किल में,
लोग अपने किनारा करते हैं।

उम्र भर साथ कौन दे सकता,
बेमतलब क्यों सहारा करते हैं।

दूर मंजिल नहीं रही उनसे,
कोशिशें जो दुबारा करते हैं।

हार कर कभी न हार माने जो,
जीने का वो इशारा करते हैं।

यदि वफादार होते साथी तो,
वक्त पर वे सहारा करते हैं।

गीता तस्वीर ज़ेहन रख रब की,
बस उसे ही निहारा करते हैं।

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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