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प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक

प्रात काल माँ नाम ले, सभी बनेंगे काम।
रूप चमत्कारी बड़ा, सुख देती अविराम।
लगता सुधा समान है, मांँ का सच्चा ज्ञान,
जो करता उपयोग है, सुरभित होता धाम।।

स्वच्छ गगन निर्मल पवन, बहती चारों ओर।
लक्ष्य साधकर संग में, पकड़ो इनकी छोर।
करो प्रेम से साधना, पूजो प्रकृति स्वरूप,
लक्ष्मी जी करती कृपा, मिले सुखद शुचि भोर।।

महिमा जिसने जान ली, रहता वह खुशहाल।
अंतस मिलती है खुशी, कटता सब जंजाल।
धन्य सुफल जीवन बने, पाकर सुख वरदान,
विष्णु प्रिया करती कृपा, चमके जग में भाल।।

जन जागृत के साथ ही, करिए आत्म सुधार।
मात-पिता का मान रख, सीख ज्ञान का सार।
धरती के भगवान ये, जिस घर पूजन नित्य,
उस घर लक्ष्मी वास हो, देती शुभ उपहार।।

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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