
बच्चे तो यह पूछने, कितना दोगे माल।
रिश्ते नाते खोखले, सिक्के चलते चाल।।
अंतस का कम हो गया, अपनों में विश्वास।
नोटों की परछाईं में, मर जाती है प्यास।।
भाव बिकाऊ हो गए, बिकता है अब प्यार।
सूना मन का आँगन है, रौनक है बाज़ार।।
देकर मीठी बोलियाँ, लेते सब कुछ छीन।
बिन पैसों के जग कहे, बंदा बड़ा मलीन।।
रजनी कुमारी
लखनऊ उत्तर प्रदेश













