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सच का हौसला

सच ऊँची आवाज़ नहीं करता,
वह बस अपने प्रकाश में चलता है।
झूठ की भीड़ चाहे जितनी शोर मचाए,
सच समय पर अडिग खड़ा रहता है।

उसका रास्ता अकेला हो सकता है,
पर वही राह इतिहास बनती है।
वह जल्दी नहीं करता,
क्योंकि उसे अपने समय पर भरोसा होता है।

इसलिए सच के साथ हो तो हार से मत घबराना।
सच का सबसे बड़ा हौसला
उसका हर परिस्थिति में सच बने रहना है।

जब दुनिया मुखौटे पहन ले,
तब भी अपना चेहरा बचाए रखना।
क्योंकि सच कभी पराजित नहीं होता,
वह केवल परखा जाता है।

डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र

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