
वाई-फाई का वरदान
मैंने सारे पुराणों को, गूगल पर पढ़ा,
बात लेकिन समझ में, वाई-फाई से आयी नहीं।
द्रौपदी को तो चीर, मिल गया था नेट से,
मेरा रिचार्ज क्यों खत्म, हुआ पता नहीं।
पाप को तुमने चुपचाप, होने दिया जुकरबर्ग,
क्यों अपडेट अपना, चलाया नहीं।
दूर जिस दिन से हम, वाई-फाई से हो गए,
कोई रिश्तेदार घर, आया नहीं।
पहले दादी कहती थी “बेटा पूजा कर ले”,
अब बोलती है “बेटा, पासवर्ड बता दे”।
पहले आरती होती थी, घंटी-शंख के साथ,
अब नोटिफिकेशन आती है, “टिंग-टोंग” के साथ।
कहते थे “कर्म कर फल की चिंता मत कर”,
अब इंस्टा कहता है “रील बना व्यू की चिंता मत कर”।
अर्जुन के पास कृष्ण थे सारथी,
हमारे पास गूगल मैप है, फिर भी भटकते हैं साथी।
पहले शादी में पंडित जी, 2 घंटे मंत्र पढ़ते थे,
अब कैमरामैन बोलता है “भाई 10 सेकंड में फोटो खींचते हैं”।
पहले सास बहू को ताने देती थी,
अब सास खुद स्टेटस लगाती है “बहू ने खाना नहीं बनाया”।
सुदर्शन नहीं चला प्रभु,
क्योंकि AMC ने रिमोट अपने पास रख लिया।
त्यौहार नहीं मनाया,
क्योंकि स्विगी पर “दिवाली ऑफर” खत्म हो गया।
इसलिए हे प्रभु, एक वरदान और दे दो,
बिना रिचार्ज वाला नेट, और बिना रुके सोना दे दो।
बाकी दुनिया जाए भाड़ में,
हम तो मीम देखकर ही खुश हो लेंगे।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि, व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर, नागपुर (महाराष्ट्र)













