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शब्द ही मेरे उस समय चुपचाप रहे

शब्द ही मेरे उसे समय चुपचाप रहे,
बस आंख से मेरे एक अश्क बहा |
और दिल के सारे दुख दर्द बोल गया,
तू मुझे क्यों छोड़ गया
तूँ मुझे क्यों छोड़ गया |……

तूँ ही तो हम राज, हमसफर था मेरा,
ऐसी क्या गलती हुई मुझसे कि तूँ |
एक पल में सारे रिश्ते नाते तोड़ गया,
तूँ मुझे क्यों छोड़ गया
,तूँ मुझे क्यों छोड़ गया….

यह जीवन खाली खाली सा लगता है,
ये गुलिस्ता बिन माली सा लगता है |
गमों के भवर में अकेला छोड़ गया,
तूँ मुझे क्यों छोड़ गया
तूँ मुझे क्यों छोड़ गया ….

इस हंसती खेलती जिंदगी में क्यों तू ,
इस छोटे से दिल को मेरे तोड़ गया|
ऐसी क्या गलती हुई तूँ मुंह मोड़ गया,
तूँ मुझे क्यों छोड़ गया,
तू मुझे क्यों छोड़ गया….

कवि राजेंद्र कुमार वर्मा
कोटा राजस्थान

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