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तुम रूठ जाओ ना

तुम रूठ जाओ ना, मैं मना लूँगा,
तेरी बिखरी ज़ुल्फ़ों को सजा दूँगा।
नयना तेरे हैं दीपक की बातियाँ,
प्यार से उनमें काजल लगा दूँगा॥

होंठ तेरे हैं पंखुड़ियाँ गुलाब की,
गाल हैं तेरे कोमल कचनार सी।
सूरत ऐसी की चाँद जमीं पर आया,
अपनी बाहों में तुझको छुपा लूँगा॥

तुम रूठ जाओ ना, मैं मना लूँगा,
तेरी बिखरी ज़ुल्फ़ों को सजा दूँगा॥

तेरी हँसी से महके मेरी हर सुबह,
दिल मेरा खिल उठे फूलों की तरह।
थाम लो हाथ मेरा जो तुम उम्र भर,
हँसते-हँसते हर ग़म को भुला दूँगा।

तुम रूठ जाओ ना, मैं मना लूँगा,
तेरी बिखरी ज़ुल्फ़ों को सजा दूँगा॥

माथे की बिंदिया तारों-सी लगे,
माँग सुन्दर विधाता ने हैं रचे।
हर मौसम तेरे संग सावन लगे,
तेरी राहों में खुशियाँ बिछा दूँगा॥

तुम रूठ जाओ ना, मैं मना लूँगा,
तेरी बिखरी ज़ुल्फ़ों को सजा दूँगा॥

साथ तेरा हो तो सफ़र आसान है,
तू ही धड़कन है मेरी, तू अरमान है।
जन्मों-जन्मों तक साथ न छूटे तेरा,
हर जनम तुझको अपना बना लूँगा॥

तुम रूठ जाओ ना, मैं मना लूँगा,
तेरी बिखरी ज़ुल्फ़ों को सजा दूँगा।

रवि भूषण वर्मा
राँची झारखंड

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