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मित्रता

मित्र बनाना है तो श्रीकृष्ण को मित्र बनाना चाहिए,
कृष्ण सो मित्र नहीं,
प्रेम भोग का नाम नहीं है,,

प्रेम योग का नाम है
प्रेम वियोग का नाम है,,

प्रेम में भगति हों न हो
कोई बात नहीं

पर भगति में प्रेम अवश्य होना चाहिए

राधा जैसी प्रेमीका नहीं, कृष्ण सा सखा नहीं

जिसने कृष्ण से प्रेम किया

साढ़े ग्यारह वर्ष कृष्ण की लीला में ही रहने के बाद, रास से लिप्त हों कर राधा सौ वर्ष तक वियोगी बनी रहीं,

अशोक सुमन

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