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कविता

बदलती जीवन शैली

आज समय आया बेढंगा,
आज आदमी बना लफंगा

मोबाइल से सब संबंध घटा दिया।

करतुतों ने कमाल कर दिया

कुछ तो वक्त में ढल कर हम बदल गए,

कुछ हालत ने हमको बदल दिया।

दूर के रिश्तों में नज़र आया अपनापन,

और अपने पसंदीदा यारों ने सब कुछ बदल दिया।

पहचान ही नहीं क़ायम रिश्तों की यहां

कुछ चेहरों ने जिन्दगी में जीने का मिज़ाज हि
बदल दिया।

हवाएं ऐसी चलने लगी है आजकल, सबका ध्यान मचल गया।

मोहब्बत से हटता गया , मोबाइल ने सबका समय हि निगल लिया

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

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