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वक्त कारसाज है

वक्त कारसाज है ;निशब्द सी आवाज है!
तुम शय किसी फेहरिस्त मे; यह दर्द का इक ख़्वाब है।।

जो आज किसी आन मे दिखा रहे कोई शान हो; बस करना इंतजार और सब इंतकाम
वो ,धरा सा रह जाएगा ,तमाशाई रंग दिखाएगा।।

तुम होगे किसी मौज मे, दिखावे की सी होड मे , चुरा सभी ले जाएगा और शब्द न निकल कोई पाएगा ; तुम होगे जिस नींद मे, करवटों की राह बींध मे, पूरी भी न होगी वो नींद ,और उड़ा कही ले जाएगा।।

कमबख्त; किसी का सगा नही, देगे अपने दगा वही, तू रटन अपने अपने की ,लगा रहा होगा कही, और अपनो से यह दूर तुझे ,खुद आप छोड़ आएगा ।।

ये वक्त ,हाँ ये वक्त यही ,जादू + गर सा बही दिखाता कुछ और है, और कर कुछ और ही जाएगा।।


संदीप शर्मा सरल।।
देहरादून उत्तराखंड ।।

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