
आलोकित हो तम मय पथ यह,
करो कृपा महरानी !
दूर करो दुर्गुण सब मेरे ,
हे जगदंब भवानी !!
लगा हुआ लव चरण तुम्हारे,
राह दिखा दो माता !
चरण शरण अनुगामी से माँ,
बालक जैसा नाता !!
बाह पकड़ कर मुझे चला दो,
हे करुणा-निधि-दानी !
दूर करो दुर्गुण सब मेरे,
हे जगदंब भवानी !!
काम सदा आऊं भयहारिणि,
दीन दुखी निबलों के !
प्रेम पंथ पर चलकर जननी,
तृषा हरुं बिकलों के !!
बनूं न पोषक सुख सुविधा का,
ऐसा दो बरदानी !
दूर करो दुर्गुण सब मेरे,
हे जगदंब भवानी !!
कमलेश विष्णु सिंह ‘जिज्ञासु’













