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कविता

बढ़ता प्रदूषण

बढ़ता प्रदूषण दुनिया में, देखो तबाही लाया है।
धूल धुएं के उड़े गुबार, दिन में अंधेरा छाया है।।

बढ़ता ध्वनि प्रदूषण देखो, हॉर्न डी जे बज रहा।
बढ़ रहे वाहन सड़कों पर ,लाउडस्पीकर बज रहा।।

प्लास्टिक का घर घर में देखो, कितना उपयोग बढ़ रहा।
फेंक रहे सड़कों पर प्लास्टिक,प्रदूषण भी बढ़ा रहा।।

शुद्ध जल पीने को मिलता ,नहीं सहज में अब यहाँ।
जल स्रोतों को नहीं संभाला, हम लोगों ने अब यहाँ।।

पानी की बर्बादी होती,सरकारी नल भी बह रहा।
टूटी फूटी पाइप लाइन,सड़कों पर पानी बह रहा।।

पेड़ काटते लोग यहाँ, ,खेतों में घर बना रहे।
छाया ढूंढे गर्मी में,पीपल नीम वट खोज रहे।

पेड़ लगाओ घर के आगे, हरियाली का काम करो।
पर्यावरण बचाओ भाई,नेक काम यह आज करो।।

डॉ.राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
कवि,साहित्यकार
भवानीमंडी राजस्थान

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