
— ओम कश्यप
लोग क्या कहेंगे, यह सोचकर,
कितने सपने रुक जाते हैं।
अपने ही मन के पंखों को,
लोग स्वयं ही काट जाते हैं।
दुनिया का यह शोर निराला,
हर पल अपना रंग बदलता।
आज हँसी का पात्र बनाओ,
कल वही सम्मान उछलता।
जीवन अपना, राह भी अपनी,
फिर क्यों डर संसार का हो।
सत्य अगर विश्वास बने तो,
कदम न कभी लाचार सा हो।
भीड़ कभी इतिहास न लिखती,
इतिहास अकेले बनते हैं।
जो अपने विश्वास पर चलते,
वही शिखरों तक पहुँचते हैं।
याद हमेशा इतना रखना,
रुकना कभी विचार नहीं।
लोग कहेंगे, कहते रहेंगे,
चलना ही इनकार नहीं।
मंज़िल जब मुस्काकर मिलेगी,
दुनिया जय-जयकार करेगी।
आज जो तुमको रोक रहे हैं,
कल वही सत्कार करेंगे।













