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बाबा विश्वनाथ की नगरी में ‘गंगांजलि’ साझा काव्य संग्रह का भव्य लोकार्पण

वाराणसी।
बाबा विश्वनाथ की पावन धरती पर आयोजित ‘बाबा श्री काल भैरव कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह’ में साझा काव्य संग्रह ‘गंगांजलि’ का भव्य लोकार्पण किया गया। यह साहित्यिक आयोजन देश भर से आए तमाम विद्वानों, साहित्यकारों और कवियों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जबलपुर से पधारे प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि संगम त्रिपाठी उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता सागर के प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. महेंद्र सिंह गौर ने की।
साहित्य मनीषियों का रहा जमावड़ा
विद्वानों की इस सभा में ‘गंगांजलि’ के लोकार्पण के अवसर पर काशी हिंदी विद्यापीठ के कुलसचिव इंद्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’, कुलाधिपति कवि सुखमंगल सिंह ‘मंगल’, उपकुलसचिव डॉ. ओमप्रकाश पांडेय ‘निर्भर’, डॉ. राम अवतार पांडेय (वाराणसी), शिवनाथ सिंह (रायबरेली), अभिमन्यु पांडेय (कुशीनगर) और प्रयागराज से अमित शर्मा विशेष रूप से मंचासीन रहे। इस भव्य आयोजन में राष्ट्रीय स्तर के कई जाने-माने कवि और कवयित्रियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
जन्मदिन के जश्न से यादगार बना आयोजन
समारोह के दौरान साहित्य के इस उत्सव के साथ-साथ काशी हिंदी विद्यापीठ के कुलसचिव इंद्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’ का जन्मदिन भी धूमधाम से मनाया गया। उपस्थित सभी अतिथियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं, जिससे यह आयोजन और भी यादगार बन गया।
भावनाओं का अद्भुत संगम है ‘गंगांजलि’
साझा काव्य संग्रह ‘गंगांजलि’ को भावनाओं का एक अद्भुत काव्य संगम बताया गया है। इस पुस्तक के संपादक डॉ. अजय शुक्ल हैं। इस संग्रह में मुख्य रूप से जबलपुर के हास्य-व्यंग्य कवि संगम त्रिपाठी, बुरहानपुर के कवि व लेखक पंकज बुरहानपुरी, लखनऊ (गोमती नगर) के गीतकार कवि श्याम फतनपुरी और प्रयागराज के कवि व लेखक डॉ. सोमनाथ शुक्ल की उत्कृष्ट रचनाओं को समाहित किया गया है।

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