
वो तेरहवाँ महीना आया,
पंचांग ने ओढ़ा काला साया;
साल के हिसाब से जो बढ़ा,
ऐसा महीना जग को न भाया।
गणना कहे अधिक मास,
जन-मानस कहें मलमास”;
अपनाया जब इसे श्री हरि ने,
शास्त्र ने कहा “पुरुषोत्तम मास”।
रवि बैठ गए एक राशि में,
चक्कर पूर्ण किए शशि ने;
पर दोनों का मेल न बैठा,
अंतर आया समय-गति में।
न शहनाई की गूंज उठे,
न मनता है कोई त्योहार;
मलमास या पुरुषोत्तम मास,
ये समय ने दिया कैसा उपहार!
इस महीने दान का मोल,
पूजा-पाठ का फल अनमोल;
व्रत जो रखे मन से सच्चा,
अमृत-रस जीवन में लेता घोल।
तो अशुभ नहीं ये मलमास,
जनमानस के लिए है ये खास;
फलित होंगे सभी दान-धर्म,
कर्म करो जो करके विश्वास।
जग कहे मलिन है ये मास,
शुभ कार्यों पर लगा विराम;
शास्त्र कहते कुछ और कहानी,
ये तो श्री हरि का पावन धाम।
_पुष्पा साहू मीरा
प्रयागराज उत्तर प्रदेश













