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हाथी ओढ़े छाता

विधा : बाल कविता

हाथी ओढ़े छाता देखो ,
हाथी ओढ़े छाता रे ।
दुम दुमक दुम , दुम दुम दुमक दुम ।
कैसे सूॅंड़ उठाता देखो ,
हाथी ओढ़े छाता रे ।।
दुम दुमक दुम , दुम दुम दुमक दुम ।
घनघोर देखो घटा यह छाई ,
मूसलाधार यह बारिश आई ।
चहुॅंओर हुआ जल प्लावन ,
जैसे मौसम यह है बौराई ।।
काली घटा काला है हाथी ,
हरा हरा यह छाता रे ।
दुम दुमक दुम , दुम दुम दुमक दुम ।
कैसे सूॅंड़ उठाता देखो ,
हाथी ओढ़े छाता रे ।।
दुम दुमक दुम , दुम दुम दुमक दुम ।
हाथी का आया नया है सत्ता ,
छाता में लगा केले का पत्ता ।
निर्माता कंपनी का नाम देख ,
स्थान लिखा है कलकत्ता ।।
बारिश से हो जन्म जन्म का ,
गहरा रिश्ता नाता रे ।
दुम दुमक दुम , दुम दुम दुमक दुम ।
कैसे सूॅंड़ उठाता देखो ,
हाथी ओढ़े छाता रे ।।
दुम दुमक दुम , दुम दुम दुमक दुम ।

अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।

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