
कविता कोश में संकलित होती है तो मुस्कुराती है कविता,
धर्म की राह दिखातीं है तो मंजिल पर पहुंचाती है कविता।
आशिकी में हुस्न को नजदिक लाती है कविता
किसी भटके हुए को राह दिखाती है कविता ,
भटके हुए दिलों को मिलाती है
जिंदगी जीने का फन सिखातीं है कविता।
इस दुनियां से दूर दिल की दुनिया बसाती है
एक नई दुनियां से रुबरु कराती है कविता।
बीन पंख के उड़ जाते हैं दिवानगी में
आसमां की सैर कराती है कविता।
दिल का हाल सूने दिल वाला
सभी रोते हुए को हंसाती है कविता
किसी के होंठों का मधुर गीत बन जाती है ,तो
कभी चुपके से
दिल में उतर जाती है कविता
किसी हुस्न कि हसरतों को सजाएं बांह में तो कभी अदब से नज़रें झुका कर
सिमट जाती है कविता।
बेनकाब हुई तो कमसीन हुई है, कविता।
पर्दा नशी बनी तो चिलमन में नजर झुका कर रही है कविता।
बरसात में जमीं की प्यास बुझाती है काली घटाऐं तो कभी बरसात की बूंदों से बदन में आग लगाती है कविता।
कभी झरने की तरह गिरतीं है तो कभी मेघों की तरह झुमके बरसतीं है कविता।
मस्ती में आ जाएं तो हवा से बातें करती है तो कभी आसमां में बादलों से बातें करती है कविता
हिम्मत दिलाता एक एक शब्द इसका , होंसला अफजाई कराती है कविता।
ज्ञानवान बच्चों को करतीं हैं गुणवत्ता से भर कर संस्कार वान बनातीं है कविता।
आरती स्तूतियां भजन और गीतों में उतर कर गायकी सिखाती है कविता।
रण बांकुरे को निर्भय करती है,
दुश्मनों को जमींदोज कर दिया करतीं हैं कविता।
बाल कविताऐं बच्चों को नैतिक शिक्षा ग्रहण कराती है,
सुंदरियों को यौवन का श्रंगार रस बरसाती है कविता।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)













