
जिस दिन उनसे मुलाक़ात होगी,
इशारों में बात होगी।
मुलाक़ात में वो होंगी या नहीं,
मगर वो मेरे साथ होगी।
नज़रों से नज़रें मिलेंगी,
दिल की हर धड़कन आबाद होगी।
कुछ लम्हे ख़ामोश बीतेंगे,
कुछ लम्हों में जज़्बात होंगे।
वो मुस्कुराएँगी हल्के से,
मेरे चेहरे पर भी मुस्कान होगी।
हाथ थामेंगी या नहीं,
मगर दिलों की मुलाक़ात होगी।
शायद वो कुछ कहेंगी नहीं,
मगर आँखों में पूरी बात होगी।
मैं भी ख़ामोश रहूँगा शायद,
फिर भी दिल से दिल की बात होगी।
वक़्त ठहर जाएगा उस पल,
हर धड़कन उनके नाम होगी।
दुनिया चाहे कुछ भी कहती रहे,
उस पल बस हमारी दुनिया होगी।
बिछड़ना फिर चाहे लिखा हो,
उस पल की अपनी ही बात होगी।
कुछ यादें साथ रह जाएँगी,
कुछ आँखों में बरसात होगी।
सदियों से जिस लम्हे का इंतज़ार है,
शायद वही मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन पल होगा।
और अगर वो पल फिर कभी लौटकर न आए,
तो भी दिल में उसकी उम्रभर याद होगी।
आर. एस. लॉस्टम













