
खुद के भीतर झांको , बाहर कभी मत देखो ,
गलती अक्सर खुद मे है,इसे तुम ही परखा ,
बाहर में गलती ढूंढने से, गलतियां ही तुझे मिलेगी ,
सही दिखाई कहीं भी तुझे कभी नही देगी ।
हैरान परेशान होकर विचलित तुम हो जाओगे
अतः खुद मे ही बदलो,सकुन से रह पाओगे ,
सुकून ही तो चाहिए ना हमे और कुछ तो नही?
सुकुन के वास्ते ,खुद के गलती को ही सुधार तो सही ।
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड













