बाबू शोभनाथ मेमोरियल ट्रस्ट, झारखंड इकाई की मासिक ऑनलाइन काव्य-गोष्ठी साहित्यिक रंगों से सराबोर रही।

बाबू शोभनाथ मेमोरियल ट्रस्ट, झारखंड इकाई द्वारा आयोजित मासिक ऑनलाइन काव्य-गोष्ठी बुधवार, 16 जुलाई 2026 को सायं 7:30 बजे से 8:30 बजे तक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े साहित्यकारों एवं काव्य-प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।अंकित उपाध्याय द्वारा आकर्षक पोस्टर डिजाइन की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ ज्योति वर्मा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। तत्पश्चात डॉ. दिवाकर पाठक, रिंकू दूबे वैष्णवी, किरण देवी, सविता धर, ज्योति वर्मा, लक्ष्मी कुमारी, सोनम झा, मधु गुप्ता ‘महनूर’, मंजुला शरण ‘मनु’, कविता जैन ‘कुहुक’, डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’, संगीता श्रीवास्तव, मनोज बरनवाल ‘अंजान’ तथा डॉ. गीता विश्वकर्मा ने अपनी-अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया।
रचनाकारों ने गीत, ग़ज़ल, छंद, मुक्तक, दोहे, सवैया तथा लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों से मंच को साहित्यिक रसधारा से सराबोर कर दिया। विविध विषयों एवं भावों से सुसज्जित रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा पूरे कार्यक्रम में साहित्यिक ऊष्मा बनी रही।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आदरणीय मनोज बरनवाल ‘अंजान’ जी ने सभी रचनाकारों की रचनाओं की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए उनके साहित्यिक योगदान की प्रशंसा की। मुख्य अतिथि एवं मंच की राष्ट्रीय सचिव आदरणीया सत्यभामा सिंह ‘जिया’ जी ने सभी प्रतिभागियों की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा उन्हें निरंतर साहित्य-साधना के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कार्यक्रम का सफल संयोजन एवं संचालन कर रही झारखंड इकाई की अध्यक्ष आदरणीया पूर्णिमा सुमन जी की विशेष सराहना करते हुए उनके साहित्यिक समर्पण और संगठन क्षमता की प्रशंसा की।
कार्यक्रम की अध्यक्ष आदरणीया डॉ. संगीता नाथ जी ने सभी रचनाओं की सारगर्भित समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने प्रत्येक प्रस्तुति के भाव, शिल्प और अभिव्यक्ति पर प्रकाश डालते हुए रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया तथा अपनी मधुर वाणी से मंच को गरिमा प्रदान की।
पूरे कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन झारखंड इकाई की अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संचालिका आदरणीया पूर्णिमा सुमन जी ने किया। अंत में उन्होंने मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथि, सभी प्रतिभागी रचनाकारों तथा उपस्थित श्रोताओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया।
काव्य-गोष्ठी साहित्यिक सौहार्द, रचनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना का सुंदर संगम बनकर स्मरणीय रही।













