
तेरे-मेरे झगड़े में पिस गए बच्चे बेचारा,
न तुम जीती, न मैं हारा।
तेरे-मेरे झगड़े में पिस गए बच्चे बेचारा,
न तुम जीती, न मैं हारा।
आस-पड़ोस भी आए, वो भी हँसकर चले गए,
किसी ने सुलझाया नहीं, बस घर-घर चर्चा होती रही।
फायदा कुछ हुआ नहीं, रोते रहे बच्चे बेचारा,
न तुम जीती, न मैं हारा।
पापा भी आए टेंशन में, माँ भी बेचारी टेंशन में,
उनकी उम्र भी ढल गई है, जी रहे हैं पेंशन में।
फायदा कुछ हुआ नहीं, भूखे रहे बच्चे बेचारा,
न तुम जीती, न मैं हारा।
खबर लगी ससुराल में, हो गए सब बुरे हाल में,
बिन टिकट ही दौड़े आए, हम दोनों के बवाल में।
फायदा कुछ हुआ नहीं, परेशान हुए ससुर बेचारा,
न तुम जीती, न मैं हारा।
बात पहुँची सरकार में, खर्च भी हुए बेकार में,
इज़्ज़त कुछ बची नहीं, हमारे-तुम्हारे तकरार में।
फायदा कुछ हुआ नहीं, पिस गए बच्चे बेचारा,
न तुम जीती, न मैं हारा।
आई हमारी विवाह की वर्षगाँठ, बैठे हम साथ-साथ,
लोगों ने खूब लुत्फ़ उठाया, खुल गई मन की सारी गाँठ।
सब नाचे-गाए, खुशियाँ मनाए, खुश दिखे बच्चे हमारा,
न तुम जीती, न मैं हारा।
रवि भूषण वर्मा
राँची झारखंड













