
दिवस खास हरियाली तीज,
मां गौरी शिव का मिलन हुआ।
घोर तपस्या बाद माँ पार्वती,
को प्रभु भोले ने वरण किया।।
पावन सावन माह निराला,
शिव को है ये माह प्यारा।
हरी-भरी हो जाती प्रकृति,
सौभाग्य का मिले वर न्यारा।।
सावन की रिमझिम बूंदों में,
नव सृजन रीत दोहराते।
जीव जंतु औ प्रकृति मोद में,
हो सुखमय मृदु गीत गाते।।
माता गौरी आशीष मिले,
औ भोले नाथ की कृपा रहे।
हरा भरा मुस्काता जीवन,
सावन जैसा फिर बना रहे।।
भगवानदास शर्मा “प्रशांत”
इटावा उत्तर प्रदेश











