
सरहद पर खड़े वो, अपनी जान देते हैं,
तब जाकर हम चैन से, घर में सोते हैं।
खून से लिखी है, आजादी की दास्तां,
शहीदों की कुर्बानी से, तिरंगा लहराता है।
मिट्टी की खुशबू में, माँ की ममता बसती है,
इस मिट्टी के लिए ही, जवान शहादत चुनते हैं।
नारे नहीं लगते, दिल से आवाज आती है,
भारत माता की जय, हर सांस में गूंजती है।
अंग्रेजों की जंजीरें, गांधी ने तोड़ दीं,
भगत की हंसी ने, फांसी को भी झुका दिया।
झांसी की रानी ने, तलवार से इतिहास लिखा,
नेताजी के नारे ने, सोई कौम को जगा दिया।
आजाद हैं हम, पर आजादी की कीमत जानते हैं,
त्योहार मनाते हैं, पर शहीदों को भी याद रखते हैं।
स्कूल की दीवारों पर, तिरंगा शान से लहरता है,
बच्चों की आंखों में, देशभक्ति का सपना पलता है।
खेत में किसान, मेहनत से अन्न उगाता है,
कारखाने में मजदूर, देश की नींव बनाता है।
डॉक्टर सेवा करता, शिक्षक भविष्य गढ़ता है,
हर हाथ जुड़ा है, जब देश आगे बढ़ता है।
सोशल मीडिया पर, नफरत ना फैलाएं हम,
जात-पात से ऊपर, इंसानियत निभाएं हम।
चाहे उत्तर हो या दक्षिण, पूरब हो या पश्चिम,
दिल में सबके बसता, एक ही हिंदुस्तान है।
‘अमन’ कलम कहती है, वतन से बढ़कर कुछ नहीं,
जान भी चली जाए, पर तिरंगा झुकना नहीं चाहिए।
एकता में ताकत है, यही पैगाम है आजादी का,
भारत जिंदा था, भारत जिंदा है, भारत जिंदा रहेगा।
जय हिंद, जय भारत 🇮🇳
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)











