
सब के मन में बातें होती , आज सुनो मेरे मन की बात।
मेरे मन की है ये चाहत, रहे सद्भाव हो कभी ना घात।।
हो अवसर सबके बढ़ने के,नहीं हो किसी का कभी दमन।
हो खुशहाल हमारी दुनिया, सारी दुनिया में हो प्रेम अमन।।
जिओ ओर जीने दो सबको, अपने पुरखों की बातें मानें ।।
वसुधैव कुटुम्बकम् हो, आपस में कभी नहीं मुक्के तानें।।
सब बालक विद्यालय जाएं, सब को इच्छित काम मिले।
शोषण मुक्त समाज हो अपना, कृषक को वाजिब दाम मिले।
सब के लिए रहने को घर हो, यहां कभी कोई बेघर नहीं रहे।
हो आपस में भाईचारा, नहीं युद्ध हो, खून किसी का नहीं बहे।
नदियां साफ स्वच्छ हो अपनी, गैया को हरी हरी दूब मिले।
सभी घरों में बहुत दूध दही हो, सब को खाने को खूब मिले।।
जो हम सब सच्चे दिल से चाहे, अपनी धरती स्वर्ग बन जाए।
कोई दुखी नहीं हो जग में, खुशियों का वितान तन जाए।।
सोनी बरनवाल “कशिश”
जमुई, बिहार













