
प्रीत के धागो के बंधन में।
स्नेह का उमड़ रहा संसार।
सारे जहां में सबसे,
सच्चा है भाई-बहन का प्यार।
इस दिन का हम बहनों को,
रहता कितना इंतजार।
बहन-भाई की कलाई पर,
बांध के रेशम डोर,
करती ईश्वर से मन्नते हजार।
लंबी उमर हो मेरे भाई की,
हरदम सुखी रहे उसका घर-संसार।
अजर-अमर है इस दुनियां में,
भाई-बहन का प्यार।
चाहे बहना पास रहे या दूर,
दूर होने पर भी देती हरपल आशीष हजार।
हो रेशम डोर कितनी भी कच्ची |
लेकिन भाई-बहन की प्रीत रहती हरदम सच्ची |
रक्षा बंधन के दिन रेशम डोर लिए हाथ में |
खड़ी द्वार पर करती अपने भाई का इंतजार |
देखो आया फिर हम भाई बहन का प्यारा सा त्योहार |
स्नेह का उमड़ रहा संसार ||
स्वरचित
मंजू अशोक राजाभोज
भंडारा (महाराष्ट्र)













